टैग्स

,


maxresdefaultउठा गुरुर,
जला दिन भर,
कुढ़ा रातों में,
दुपक गया फिर –
या शायद मर गया.
वो ग़लतफहमी में –
ज़िन्दगी जी गया.
अब क्या फायदा!
दरवाजे सब बंद हुए,
बिसात के प्यादे –
मंद हुए.
लकीरे मिट गई सब,
सुना है उसकी –
सोहबत बिगड़ गई थी.

Advertisements