अनुभवों का खजाना आप ..
उम्मीदों का कारवां भी ..
ख्वाबों का मसीहा आप ..
शब्दों का आसमां भी ..

सूरज सी चमक लिए ..
चंदा सी ठंडक भी ..
जुगनू सा क्रोध लिए ..
दीपक सा होसला भी ..

एक द्रण चट्टान कहूँ –
या कहूँ, झील सा गंभीर ..
सुकूं कहूँ छाँव का-
या फिर कहूँ,
कुशल सैनिक का धीर ..

आपका स्थान अनोखा है ..
तिलों सा त्याग अनोखा है ..
मेरी हर उमंग हैं आप ..
आपका हर मुकाम अनोखा है …

पापा, मैं डरता नहीं अब-
दुनिया के मेलों से ..
पापा, मैं रुकता नहीं अब-
तुफानो के झमेलों से ..

आप हैं संग मेरे –
ये ख्याल है हरदम ..
मेरी नींव का हर एक पत्थर,
आप ही तो हैं!

– आपका बेटा

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